Tuesday, May 28, 2019

广东肇庆局部地区空气中有“咸鱼味”? 官方回应

  中新网客户端5月28日电 针对“群众投诉空气中有‘咸鱼味’”情况,27日,广东省肇庆市委办公室微信公众号发布通报称,由于暴雨雨水把地面的污染物冲刷进入下水道,排入河涌,高温加速了有机物质腐化反应,释放出含硫、含氨臭味的气体,加之夜晚高空存在下沉气流,地面持续静风,不利于污染物输送扩散,从而导致局部地区出现“咸鱼味”等异味现象。

  通报称,近日,广东省肇庆市端州区城中、城东区域出现不同程度的“咸鱼味”,相关单位陆续收到群众投诉。对此,肇庆市生态环境局迅速组织执法人员,分两组对端州内工业企业、水道管网及异味反映强烈区域进行摸排,全力追查异味源头。经排查,广东肇庆星湖生物科技股份有限公司星湖生化制药厂周边无明显异味现象,周边居民表示前进路、和平路未发现异常现象。随后,执法人员对星湖周边进行巡查。由于26日晚下雨,因此造成星湖水质浑浊,偶尔可闻到鱼腥味。同时,在排查跃龙涌和景蓝干渠沿线中发现其没有覆盖区域存在污泥发酵味道,异味为阵发性。

  通报指出,结合往年城区“咸鱼味”事件分析,本次“咸鱼味”出现的时间及气象条件与往年都十分相似。同是在4、5月份的初夏季节,臭味出现前均曾下大雨,其后天气转晴,最高气温在29℃以上,晚上8时以后城区风速多小于1米/秒,以上条件均符合往年“咸鱼味”出现的特征。

  通报称,综合排查情况及群众反映异味的位置,并咨询相关专家意见后,判断是由于暴雨雨水把地面的污染物冲刷进入下水道,排入河涌,高温加速了有机物质腐化反应,释放出含硫、含氨臭味的气体,加之夜晚高空存在下沉气流,地面持续静风,不利于污染物输送扩散,从而导致局部地区出现“咸鱼味”等异味现象。

  据悉,目前,肇庆市环境局已协调相关单位加强当下季节下水道疏通和冲洗工作,减少异味产生。

  通报介绍,目前,肇庆市已委托有资质单位编制《端州城区污水管网改造工程(首期)可行性研究报告》,并以城区污水管网特许经营推进污水管网建设,由特许经营中标单位肇庆市水务集团有限公司实施,预计今年8月施工,明年完成项目建设。项目将建成约125公里污水管网,将城东片区和跃龙片区部分污水引至肇庆市第一污水处理厂和肇庆市第二污水处理厂处理,有效缓解异味产生。

  与此同时,在管网建设工作完善前,肇庆市还委托了东莞市江夏建设工程有限公司和广东五色时空生态环境科技有限公司,分别对泰湖新城小区干渠以及羚山涌河旁村-顺宝天誉流段、星湖-敏捷城流段开展生态治理工程,应急解决当前异味扰民问题。

Tuesday, May 21, 2019

क्या नरेंद्र मोदी का केदारनाथ दौरा 'सरोगेट कैंपेनिंग' था?

17वीं लोकसभा के चुनाव के लिए सातों चरणों का मतदान पूरा हो चुका है, चैनलों और सर्वे एजेंसियों के एग्ज़िट पोल आ चुके हैं और अब 23 मई को आने वाले नतीजों का इंतज़ार है.

जैसे ही आख़िरी चरण के मतदान के लिए प्रचार थमा था, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड के केदारनाथ जाकर बुद्ध पूर्णिमा पर पूजा अर्चना की थी.

यहां उन्होंने क़रीब 17 घंटा बिताए और गुफ़ा में ध्यान भी लगाया. इससे पहले उन्होंने केदारनाथ में 2013 में आई आपदा के बाद किए जा रहे पुनर्निर्माण कार्यों का जायज़ा भी लिया था.

जिस समय मोदी यह सब कर रहे थे, उनकी तस्वीरें और वीडियो टीवी चैनलों, वेबसाइटों और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुंच रहे थे.

विपक्षी दलों ने इसे लेकर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि यह आदर्श आचार संहिता के तहत आख़िरी चरण के लिए चुनाव प्रचार थम जाने के बाद अप्रत्यक्ष ढंग से किया जा रहा चुनाव प्रचार है.

तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने पत्र लिखकर चुनाव आयोग से इस बारे में शिकायत भी की थी और इस यात्रा पर रोक लगाने की मांग की थी.

इस पूरे घटनाक्रम से कुछ सवाल उठ खड़े हुए हैं जिन पर चर्चा हो रही है. जैसे, मोदी की केदारनाथ यात्रा का हासिल क्या था? क्या यह एक तरह से चुनाव प्रचार था? क्या चुनाव के दौरान प्रचार थम जाने पर बड़े नेताओं का सार्वजनिक कार्यक्रमों में या निजी धार्मिक यात्राओं पर जाना ग़लत है?

क्या यह प्रचार था?

नरेंद्र मोदी की केदारनाथ यात्रा के लिए एक टर्म इस्तेमाल किया जा रहा है- सरोगेट कैंपेनिंग. सरोगेट कैंपेनिंग यानी अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव प्रचार करना.

चूंकि मतदान से 48 घंटे पहले चुनाव प्रचार थम जाता है, ऐसे में कोई भी नेता या पार्टी उन सीटों पर प्रचार नहीं कर सकते जहां मतदान होना है.

ऐसे में अगर कोई खुलकर प्रचार किए बिना अप्रत्यक्ष ढंग से कुछ ऐसा करता है जिससे मतदाताओं को प्रभावित किया जा सकता है, तो उसे सरोगेट कैंपेनिंग कहा जाता है.

वरिष्ठ पत्रकार राधिका रामासेशन बताती हैं कि पीएम मोदी की केदारनाथ यात्रा भी कुछ लोग सरोगेट कैंपेनिंग कह रहे हैं. वह बताती हैं कि पीएम के कहीं जाने पर वैसे तो कोई रोक नहीं है, मगर यह मामला नैतिकता और शिष्टाचार से जुड़ा हुआ है.

वह कहती हैं, "तकनीकी और क़ानूनी हिसाब से देखें तो मुझे नहीं लगता कि उन्होंने कुछ ग़लत किया है. मगर राजनीति और चुनाव में शिष्टाचार का भी सवाल आता है. भले ही वह मंदिर जाएं, पूजा करें मगर साथ में जो न्यूज़ एजेंसी को ले जाने के आरोप लग रहे हैं और उनकी गतिविधियों की पल-पल की जानकारी सभी तक पहुंच रही है, सवाल उस पर उठ रहे हैं."

राधिका मानती हैं कि इसका प्रभाव उन जगहों पर ज़ूरूर हुआ होगा, जहां पर मतदान होने वाला था. उन्होंने कहा, "उत्तराखंड में बेशक मतदान ख़त्म हो गया था मगर बग़ल के राज्य हिमाचल, जिसे देवभूमि कहते हैं, वहां मतदान होना था. वाराणसी में भी मतदान होना था जहां से मोदी चुनाव लड़ रहे हैं. साथ ही यूपी, बिहार वगै़रह, जहां आस्था और धर्म की अहमियत है, वहां कुछ तो असर हुआ होगा मतदाताओं पर. वैसे तो प्रधानमंत्री ने कोई ग़लत काम नहीं किया और उन्होंने कहा भी कि वह चुनाव आयोग को सूचित करके आए हैं मगर यहां मामला नैतिकता का है."

वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केदारनाथ यात्रा को अलग नज़रिये से देखते हैं. उनका मानना है कि कि चुनाव प्रचार इसका छोटा सा अंश हो सकता है, मगर यह उनकी निजी आस्था का सवाल है.

वह कहते हैं कि पीएम रहते हुए मोदी चौथी बार केदारनाथ गए हैं और यह उनकी आस्था का निजी पक्ष है. हालांकि उनका मानना है कि वह इसे चुनाव प्रचार की दृष्टि से किए गए काम के बजाय दीर्घकालिक रणनीति के तहत किया गया काम ज़्यादा मानते हैं.

प्रदीप सिंह कहते हैं, "मेरा मानना है कि जैसे 2014 में जीत हासिल करने के बाद मोदी ने अपने शपथ ग्रहण में पड़ोसी देशों के राष्ट्राध्यक्षों को बुलाया था, वह 2019 के चुनाव प्रचार की शुरुआत थी. मोदी बहुत आगे का प्लान करके चलते हैं. उनका केदारनाथ जाना 2024 को ध्यान में रखते हुए उठाया गया क़दम है."

अपने तर्क के समर्थन में प्रदीप सिंह कहते हैं, "केदारनाथ वाली उनकी इमेज लोगों के दिमाग़ में रहने वाली है. अब जब कभी वह भारतीय संस्कृति, हिंदू धर्म और धार्मिक स्थानों को लेकर बात करेंगे तो लोगों के दिमाग़ में सीधे उनकी यही इमेज आएगी. मोदी जानते हैं कि किस छवि का इस्तेमाल कैसे करना है."

इस तरह परोक्ष प्रचार के आरोप नरेंद्र मोदी पर ही नहीं, अन्य नेताओं पर भी उठते रहे हैं. जैसे कि जिस समय यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर चुनाव आयोग ने प्रचार करने की पाबंदी लगाई थी, वह हनुमान मंदिर पहुंचे थे और मीडिया ने इसे भी कवर किया था.

तो क्या ये सवाल मीडिया कवरेज के कारण उठ रहे हैं?

वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश मोदी की केदारनाथ यात्रा पर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों को वाजिब तो मानते हैं मगर इस पूरे मामले को लेकर एक अहम सवाल उठाते हैं.

वह कहते हैं कि बात सिर्फ़ इस घटना की नहीं है, अलग-अलग चरणों में चुनाव होने के कारण जब एक जगह प्रचार थमता है तो अन्य जगहों पर किए जा रहे प्रचार की पहुंच सभी तक हो जाती है.

उर्मिलेश कहते है, "प्रधानमंत्री क्या, किसी को भी देश के संविधान के हिसाब से उपासना की स्वतंत्रता है. मगर सवाल इसलिए उठा कि प्रधानमंत्री 59 सीटों पर मतदान से पहले केदारनाथ गए. अगर वह अकेले जाते तो कोई सवाल न उठता. उनके साथ टीवी चैनल और चैनलों को फ़ीड मुहैया करवाने वाली एजेंसियां भी थीं. उन्होंने मोदी की गतिविधियों को कवर किया तो विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह मतदाताओं पर असर डालने की कोशिश है. तो टीवी के कारण आप जाने-अनजाने राजनीतिक कारणों से पूजा और उपासना को इस्तेमाल तो कर ही रहे हैं."

Tuesday, May 14, 2019

मोदी की हवा विदेशी मीडिया में कैसे बदलती है

पांच साल पहले भारत में ग़ैर-कांग्रेसी सरकार बनने के बाद कई बार ऐसे मौक़े आए जब अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने प्रधानमंत्री मोदी पर कवर-स्टोरी करके अलग-अलग तरह से उनके कार्यकाल और कार्यशैली पर टीका-टिप्पणी की.

इस सिलसिले में ताज़ा कड़ी अमरीका की टाइम मैगज़ीन है जिसने लिखा है, ''क्या दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र मोदी सरकार को आने वाले और पांच साल बर्दाश्त कर सकता है?"

अमरीकी पत्रिका ने ये सवाल अपने उस अंक के कवर पेज के साथ ट्वीट किया है जो भारतीय बाज़ार में 20 मई 2019 को जारी किया जाएगा.

टाइम मैगज़ीन की वेबसाइट पर प्रकाशित स्टोरी के कवर पेज पर मोदी को 'India's Divider In Chief' बताया गया है, जिस पर काफी विवाद हुआ है.

ध्यान देने वाली बात ये है कि चार साल पहले 2015 में मई के अंक में भी TIME मैगज़ीन ने भारतीय प्रधानमंत्री मोदी पर कवर स्टोरी की थी और तब उसका शीर्षक था- "Why Modi Matters".

इसी तरह फोर्ब्स पत्रिका में 16 मार्च 2019 को छपे एक लेख में लिखा है कि ''मोदी ने देश-विदेश में भारत को ऊपर उठाया है, लेकिन शासन करने की अपनी शैली की वजह से उन्हें अपनी कुर्सी से हाथ धोना पड़ सकता है.''

लेख में कई अन्य बातों के साथ ये भी लिखा गया है कि ''मोदी की नीतियां आम लोगों तक पहुंचने में विफल हुईं, यहां तक कि औसत भारतीय की मोदी के दौर में हालत ख़राब हुई है.''

साल 2019 में पीएम मोदी की आलोचना से दो वर्ष पहले 18 नवंबर 2017 के एक लेख में फोर्ब्स ने लिखा था- Modi's India Is Rising जिसका मतलब हुआ मोदी का भारत आगे बढ़ रहा है.

इसमें कहा गया था, ''प्रधानमंत्री मोदी विश्व आर्थिक मंच पर भारत को आगे बढ़ा रहे हैं, भारत की रैंकिंग बेहतर हो रही है, मोदी ने संरचनात्मक सुधार किए हैं.''

लेकिन द इकोनॉमिस्ट ने अपनी रिपोर्ट में यहां तक कह दिया कि मोदी ने मौक़ा गंवा दिया है. इस रिपोर्ट में बताया गया कि मोदी ने ऐसा कोई आर्थिक सुधार नहीं किया, जिसकी उम्मीद की जा रही थी. इसमें भारतीय प्रधानमंत्री को एक सुधारक की तुलना में एक प्रशासक ज़्यादा बताया गया.

इसी तरह वॉशिंगटन पोस्ट ने इसी साल जनवरी में छापा कि ''मोदी भारत की अर्थव्यवस्था को सुधारने में नाकाम हुए हैं. मोदी भारतीय अर्थव्यवस्था को 7 प्रतिशत ग्रोथ रेट से आगे नहीं ले जा पाए और नोटबंदी से वो लक्ष्य हासिल नहीं हुए जिसके लिए ये कदम उठाया गया था.''

भारतीय बनाम विदेशी मीडिया

कुछ जानकारों का मानना है कि विदेशी मीडिया तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग और भारतीय अंग्रेज़ी मीडिया से प्रभावित होकर अपनी बात कहता है.

फॉरेन कोरेस्पोंडेंट क्लब (एफसीसी) के प्रेसीडेंट और वरिष्ठ पत्रकार एस. वेंकट नारायण कहते हैं, ''बात ये है कि विदेशी मीडिया और उसके संवाददाता अपनी जानकारी के लिए बहुत हद तक उन अंग्रेज़ी अख़बारों पर निर्भर हैं जो दिल्ली से छपते हैं. उनमें से कुछ ही होंगे जो भारत के अलग-अलग हिस्सों में जाकर ज़मीनी जानकारी जुटाते हैं, बाक़ी अधिकतर संवाददाता भारत के तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग से प्रभावित होते हैं जिन्हें अंग्रेज़ी मीडिया में जगह मिलती है. ऐसा इंदिरा गांधी के मामले में भी होता था.''

वरिष्ठ पत्रकार एस. वेंकट नारायण का मानना है कि सिर्फ़ हेडलाइन के आधार पर किसी तरह की पुख़्ता धारणा नहीं बनाना चाहिए. टाइम मैगज़ीन के चर्चित ताज़ा अंक का हवाला देते हुए वो कहते हैं, ''हेडलाइन से आगे बढ़कर कवर स्टोरी को पढ़ेंगे तो आप पाएंगे कि उसमें ये भी कहा गया है कि कांग्रेस पूरी तरह से बेकार है और बस इतना कर पाई है कि राहुल गांधी की मदद के लिए बहन प्रियंका को लेकर आए. लिखा तो ये भी है कि विपक्ष इतना कमज़ोर है कि मोदी का कुछ बिगाड़ नहीं पाएंगे.''

Thursday, May 9, 2019

Скандал с отмыванием миллиардов евро. В Дании предъявлено обвинение экс-главе Danske Bank

Датская прокуратура предъявила бывшему исполнительному директору Danske Bank Томасу Боргену обвинение в причастности к одному из самых громких мировых скандалов с отмыванием денег. Об этом сообщает газета Borsen со ссылкой на адвоката самого Боргена. Financial Times со ссылкой на источник подтверждает, что Боргена обвиняют в том, что тот не смог предотвратить ряд сомнительных сделок.

Адвокат Питер Шрадик подтвердил также, что 12 марта в доме у Боргена был проведен обыск.

В отношении Danske Bank ведется расследование по подозрению в отмывании около 200 млрд евро, которые были проведены через эстонское отделение банка в период с 2007 по 2015 год. Подозрительные переводы шли из России и других бывших республик СССР.

Государственный прокурор Дании еще в ноябре предъявил банку предварительные обвинения в нарушении законов страны по борьбе с отмыванием денег, касающиеся его эстонского отделения.

Тогда же прокурор подчеркнул, что позже определит, будут ли предъявлены индивидуальные обвинения.

В сентябре, когда в ходе следствия выяснились масштабы подозрительных выплат, Борген ушел в отставку.

От отвечал за международные операции Danske Bank, включая Эстонию, в период с 2009 по 2012 год.

Инвесторы все еще ждут, какие потенциальные штрафы могут предъявить банку в связи с этим скандалом власти США и других стран.

Претензии к Danske Bank
В 2014 году финансовая инспекция Эстонии обнаружила в банке "систематические нарушения процедур контроля рисков": филиал, вероятно, не всегда знал, чьи деньги он проводил через свои счета, а также источник их происхождения.

После этого два года подряд Danske Bank переживал череду проверок и претензий. Он начал закрывать подозрительные счета в эстонском филиале, а в 2015 году полностью закрыл все счета нерезидентов.

В марте 2017 года Центр по исследованию коррупции и организованной преступности OCCRP, объединяющий журналистов из разных стран, рассказал новые подробности о схеме отмывания средств, получившей название "ландромат", или "молдавская схема". По его информации, при помощи молдавских судов из России с 2011 по 2014 годы вывели около 22 млрд долларов.

В феврале 2018 года датская газета Berlingske и британская Guardian сообщили, что в эстонском филиале Danske Bank, возможно, отмывались деньги "родственника Владимира Путина" и лиц, связанных с ФСБ. Пресс-секретарь российского президента тогда заявил, что "это не вопрос Кремля" и они не знают ничего об этом.

В сентябре 2018 года газета Financial Times со ссылкой на независимое расследование написала, что за один год через эстонское представительство Danske Bank было отмыто 30 млрд долларов из России и бывшего СССР.

Знакомый с расследованием человек говорил Financial Times: "От такой гигантской суммы в небольшом филиале захватывает дух. Такая огромная сумма не может там просто находиться, не вызывая вопросов".

Monday, May 6, 2019

中美贸易谈判:特朗普加征关税致全球市场动荡,中国回应称磋商将继续

在美中两国即将于本周在华盛顿进行高级别贸易谈判的最后关头,美国总统特朗普周日意外宣布将对中国商品加征关税,使世界两大经济体之间的紧张局势突增。

贸易磋商能否继续?
特朗普周日(5月5日)宣布对2000亿美元的中国商品关税从10%提高到25%,他还进一步威胁将对另外的3250亿美元中国商品课税。

特朗普的言论正值中美贸易谈判进入最后冲刺阶段。中国国务院副总理刘鹤本来预计将于本周抵达华盛顿,有超过100名中国官员随访,外界曾预期双方可能会签署最终协议。

在周一(5月6日)下午的中国外交部记者会上,中国外交部发言人耿爽称,中方团队正在准备赴美国参与贸易磋商,但其没有直接回应刘鹤是否会前往。

他还表示,美国应与中国合作,在相互尊重的基础上达成互利共赢的条约。“这符合中国、美国和国际社会的利益。”

此前,《华尔街日报》和CNBC报道称,在特朗普发布加征关税的言论后,中国“正考虑取消预定于本周进行的贸易谈判”。

中国官方《环球时报》总编辑胡锡进在推特表示,特朗普不懂关税如何运作。他认为刘鹤在特朗普的关税威胁下,本周应该不太可能访问美国。

特朗普此次要加征关税的2000亿美元中国商品,原定于今年1月1日起实施。但去年12月,中美两国宣布进入临时休战期。

自此之后的几个月,美中两国一再表示谈判正取得“积极进展”。甚至于上周五,特朗普仍表态两国的谈判“进度良好”。

然而,美国财政部长史蒂文·穆努钦(Steven Mnuchin)上周的表态似乎有意降低外界预期。他表示,如果未能得到满意的协议,谈判将“继续下去”。

如今,特朗普的态度显然发生了明显的转变。他责备中美两国进行的贸易谈判“进展太慢”,因为中国试图讨价还价。

特朗普发布推文后,白宫经济顾问库德洛(Larry Kudlow)称,总统是在对中国“发出警告”。“我是一个支持自由贸易的人,但总统的征税在谈判中一直非常有效,”库德洛说。

纽约州参议员、民主党领袖查克·舒默(Chuck Schumer)对特朗普的决定表示欢迎。他表态称:“别退缩。实力是战胜中国的唯一途径。”

美国商务部4月份公布的美国一季度经济数据显示,美国一季度GDP增长3.2%,远超各界预期,这也是近六年来,美国一季度GDP增长首度超过3%。

而美国劳工部的数据显示,4月份美国非农就业人数增加26.3万人,远超华尔街预期的19万人;失业率更意外下降到3.6%,为1969年12月以来低点。

不过,特朗普的此次决定还是遭到了美国服装鞋类协会(AAFA)的谴责。协会总裁海芬斌(Rick Helfenbein)表示,更多的关税将“使美国家庭处于不利地位,并对经济增长增添额外障碍。”

他的团队估计,对该行业商品加征至25%的关税,会使一家四口的生活成本每年增加约500美元。

全球市场震荡
特朗普的推文对于此前乐观的市场预期影响严重,全球市场低开,亚市早盘,美股期货和油价大跌,现货黄金、日元等避险资产跳涨。

道指期货跌1.73%,标普500期货跌1.77%,纳指期货跌2.08%。WTI原油期货目前跌2.97%;现货黄金涨3美元,报1284.3美元/盎司。

离岸人民币汇率周一早盘暴跌,一度跌破6.82关口,跌幅为2016年1月以来最大。在岸人民币兑美元开盘报6.7880,较上周五夜盘收盘跌530点,创1月23日以来新低。

刚刚结束劳动节假期的中国大陆沪深两市双双大幅低开。上证综指最大跌幅近5%,深证成指跌近6%。香港恒生指数大跌近3%,台湾加权指数下跌1.8%。