Tuesday, January 1, 2019

पर्थ के बाद MCG की पिच को भी ICC ने ‘औसत’ करार दिया

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच एमसीजी पर खेले गए तीसरे टेस्ट क्रिकेट मैच की पिच को भी पर्थ स्टेडियम की तरह ‘औसत’ करार दिया. ‘सिडनी मार्निंग हेराल्ड’ की रिपोर्ट के अनुसार, ‘मेलबर्न क्रिकेट क्लब का बॉक्सिंग डे टेस्ट मैच का मेजबान बने रहने की कवायद को बढ़ावा मिला है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने भारत की 137 रनों से जीत के बाद एमसीजी को औसत दर्जा ही दिया है.

रिपोर्ट के अनुसार आईसीसी ने मंगलवार को औसत दर्जा दिए जाने की पुष्टि की. यह पिछले साल ड्रॉ छूटे एशेज टेस्ट मैच की तुलना में बेहतर दर्जा है, क्योंकि तब एमसीजी की पिच को तीन ‘डिमेरिट प्वाइंट’ मिले थे. औसत दर्जा मिलने का मतलब है कि आईसीसी से इस मैदान को कोई ‘डिमेरिट प्वाइंट’ नहीं मिला है. आईसीसी के नियम के अनुसार अगर किसी मैच स्थल को पांच साल के अंदर पांच ‘डिमेरिट प्वाइंट’ मिलते हैं, तो उसका अंतरराष्ट्रीय दर्जा खत्म हो जाता है.

एमसीजी की पिच तब चर्चा में आई, जब भारत ने लगभग दो दिन तक बल्लेबाजी करते हुए 443 रन बनाए. यहां तक कि उसके प्रमुख बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा ने धीमी बल्लेबाजी का कारण पिच की प्रकृति को बताया था. इसके बाद हालांकि जब भारत ने गेंदबाजी की तब लग रहा था कि विकेट जीवंत हो गया है. ऑस्ट्रेलिया के 20 में से 15 विकेट भारतीय तेज गेंदबाजों ने लिये.

एमसीजी की वर्तमान पिच 15 साल पुरानी है, लेकिन अगले सत्र में भी इसका उपयोग किया जाएगा. नई पिच तैयार करने में तीन साल का समय लगेगा. इससे पहले पर्थ स्टेडियम की पिच को भी आईसीसी ने औसत दर्जा दिया था, जिस पर ऑस्ट्रेलियाई कोच जस्टिन लैंगर सहित कई पूर्व क्रिकेटरों ने हैरानी जताई थी.

ऑस्ट्रेलिया ने पर्थ में दूसरे टेस्ट मैच में जीत दर्ज कर सीरीज में 1-1 से बराबर कराई थी. भारत अब चार मैचों की सीरीज में 2-1 से आगे चल रहा है. चौथा और अंतिम मैच गुरुवार से सिडनी में खेला जाएगा.

अयोध्या विवाद को सुलझाने के लिए नेताओं से लेकर अदालतों तक बहुत सी कोशिशें की जा चुकी हैं, लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकल सका है. ऐसे में सारी उम्मीदें सुप्रीम कोर्ट से लगी हैं. कोर्ट इस मामले में सुनवाई कब होगी, इस पर 4 जनवरी को फैसला करेगा. हालांकि इस मामले के फैसले के लिए चारो ओर से आवाज उठ रही है.

दरअसल, ऐसा माना जाता है कि साल 1528 में अयोध्या में एक ऐसी जगह पर बाबरी मस्जिद का निर्माण किया गया, जिसे हिंदू भगवान राम का जन्मस्थान मानते हैं. कहा जाता है कि विवादित जगह पर मस्जिद मुगल बादशाह बाबर के समय में उसके सेनापति मीर बाकी ने बनवाई थी. इस लिहाज से 500 साल पुराना मामला पहली बार आजादी के बाद 1950 में अदालत पहुंचा. इसके बाद से अभी तक फैसले का महज इंतजार हो रहा है. ऐसे में अब मामला देश की सबसे बड़ी अदालत में है और सुनवाई की तारीख भी नए साल के साथ दस्तक दे रही है.

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